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क्लाइमेट चेंज (Climate Change) books “उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत” —

क्लाइमेट चेंज (Climate Change) books “उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत” —, , , , ( ) , , , , ? ?

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Description

“उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत” — उठो

इसलिए श्रम करने से बचते हैं और एक औसत स्तर के जीवन से समझौता कर लेते हैं। लेकिन वही निकृष्ट ज़िन्दगी अपने बन्धनों को तोड़ने की प्रेरणा भी बन सकती है। आचार्य प्रशांत की यह पुस्तक आमंत्रण है उन सभी के लिए जो ऊँचाई के अभिलाषी हैं। प्रस्तुत पुस्तक में आप यह समझ पाएँगे कि उत्कृष्टता क्या है

इसके लिए सबसे आवश्यक है ध्यान का विषय और उद्देश्य। आमतौर पर हमसे यही पर भूल होती है। हमारे ध्यान का विषय बनती है कोई भौतिक वस्तु और उद्देश्य होता है कामनापूर्ति। जबकि वास्तविक ध्यान में सबसे महत्वपूर्ण है ध्यान के विषय का विवेकपूर्ण चुनाव।

और उन्हें पूरा करने के लिए अनेक संकल्प उठाते हैं। बहुत बार उन संकल्पों को पूरा करके बाहर-बाहर हम बहुत कुछ अर्जित भी कर लेते हैं

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